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उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद् सन् 1912 में तत्कालीन कृषि रसायनज्ञ जार्ज क्लार्क द्वारा एक शोध केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया था। सन् 1931 में शुगर टैरिफ एक्ट लागू होने के साथ ही चीनी उद्योग तीव्र गति से विकसित हुआ और गन्ना राज्य की प्रमुख नकदी फसल बन गया।
 
देश के अग्रणी गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की शीर्ष प्रतिष्ठित संस्था, उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद्, शाहजहाँपुर के निदेशक के पद का दायित्व मैंने दिनाॅंक 27 अक्टूबर 2014 को ग्रहण किया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश की गन्ना उत्पादकता लगभग 62 टन प्रति हेक्टेयर एवं चीनी परता 9.2 प्रतिशत है...
उत्तर प्रदेश में 1918 से अब तक गन्ने की कुल 216 प्रजातियॉं खेती हेतु स्वीकृत की जा चुकी हैं जिनमे 89 प्रजातियाँ को०शा० 12 प्रजातियाँ यू०पी० तथा 20 प्रजातियाँ को०से० की है वर्तमान में उ0प्र0 में सामान्य खेती हेतु कुल 54 प्रजातियॉं स्वीकृत हैं। विभाग द्वारा केवल स्वीकृत प्रजातियों का ही बीज वितरित किया जायेगा।
गन्ना शोध संस्थान की स्थापना के साथ ही एक कमरे में संचालित पुस्तकालय वर्ष 1982 मे उच्चीकृत किया गया। पुस्तकालय में गन्ना कृषि, फसल सुधार, कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, फसल सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी सहित समस्त संबंधित विषयों पर प्रकाशित भारतीय एवं विदेशी पुस्तकें, जर्नल्स, शोध पत्रिकायें, रिपोर्ट आदि समय–समय पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।