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उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद् सन् 1912 में तत्कालीन कृषि रसायनज्ञ जार्ज क्लार्क द्वारा एक शोध केन्द्र के रूप में स्थापित किया गया था। सन् 1931 में शुगर टैरिफ एक्ट लागू होने के साथ ही चीनी उद्योग तीव्र गति से विकसित हुआ और गन्ना राज्य की प्रमुख नकदी फसल बन गया।
 
उत्तर प्रदेश के 42 लाख गन्ना कृषकों के हितों हेतु सतत प्रयत्नशील देश की इस शीर्श संस्था ’’उ.प्र. गन्ना शोध परिषद’’ के निदेशक के रूप में मेरे द्वारा दिनाँक 17 अप्रैल 2018 को कार्यभार ग्रहण किया गया। लगभग 23 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल से आच्छादित उत्तर प्रदेश की औसत उपज ...
उत्तर प्रदेश में 1918 से अब तक गन्ने की कुल 216 प्रजातियॉं खेती हेतु स्वीकृत की जा चुकी हैं जिनमे 89 प्रजातियाँ को०शा० 12 प्रजातियाँ यू०पी० तथा 20 प्रजातियाँ को०से० की है वर्तमान में उ0प्र0 में सामान्य खेती हेतु कुल 54 प्रजातियॉं स्वीकृत हैं। विभाग द्वारा केवल स्वीकृत प्रजातियों का ही बीज वितरित किया जायेगा।
गन्ना शोध संस्थान की स्थापना के साथ ही एक कमरे में संचालित पुस्तकालय वर्ष 1982 मे उच्चीकृत किया गया। पुस्तकालय में गन्ना कृषि, फसल सुधार, कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, फसल सुरक्षा, जैव प्रौद्योगिकी सहित समस्त संबंधित विषयों पर प्रकाशित भारतीय एवं विदेशी पुस्तकें, जर्नल्स, शोध पत्रिकायें, रिपोर्ट आदि समय–समय पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।