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गन्ने में लगने वाले नाशिकीटों की पहचान एवं हानियॉ
भारत में क्षेत्रफल अधिक होते हुए भी प्रति इकाई उत्पादन अन्य देषों की तुलना में कम है, इसका मुख्य कारण नवीनतम कृषि तकनीकी का कृशकों तक समय से न पहुँचना एवं फसल सुरक्षा पर कृषकों द्वारा कम ध्यान दिया जाना है। अन्य फसलों की अपेक्षा गन्ने में हानि पहुंचाने वाले कीटों की संख्या अधिक पायी जाती है। बुवाई से कटाई तक गन्ने के सभी भागों में मौसम के अनुसार समय–समय पर भिन्न–भिन्न प्रकार के कीटों द्वारा हानि पहुचायी जाती रहती है जैसे बेधक कीट, भूमिगत कीट, पत्ती खाने वाले कीट एवं चूषक कीट ।
भूमिगत कीट
 
1.दीमक

यह कीट गन्ने के टुकड़ों के आंख एवं सिरे को खाकर नष्ट कर देता है जिससे जमाव प्रभावित होता है। खड़े गन्ने में खाये हुए भाग में मिट्टी भर जाती है। इस कीट का प्रकोप हल्की बलुई मिट्टी तथा असिंचित खेतों में अधिक होता है।

हानि
इस कीट द्वारा 30 से 60 प्रतिषत तक टुकड़ों की आँख नश्ट हो जाती हैं जिससे 33 प्रतिषत तक उपज में कमी तथा 1 से 2 इकाई तक चीनी के परते में कमी हो जाती है।
नियन्त्रण
1.प्रभावित खेतों की सिंचाई करते रहने से कीट का प्रभाव कम हो जाता है।
2.बुवाई के समय पैंडो के ऊपर निम्न नाशिकीट में से किसी एक का प्रयोग करके ढक देना चाहिए।
अ- रीजेन्ट, फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत रवा दर 20 कि0ग्रा0 / हे0 ।
ब - इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत (Confidor) घोल के 400 मि0ली0 / हे0 को 1875 ली0 पानी मे घोलकर ।
स- मेटाराइजियम एनीसोपिली की 5 कि0ग्रा0 / हे0 की मात्रा 1 या 2 कुंतल सड़ी हुई प्रेसमड या गोबर की खाद में मिलाकर बुवाई के समय पैंडो पर डालकर ढक दें।
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