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टिड्डा (ग्रॉसहॉपर)
ग्रॉस हॉपर मुख्य रूप से घासकुल पर जीवन निर्वाह करने वाला कीट है जिसे फुदका/टिड्डा भी कहते हैं। यह कीट ज्वार, मक्का, धान आदि फसल के अतिरिक्त गन्ना फसल पर भी भीषण रूप से आक्रमण करता है। गन्ना फसल पर इस कीट की मुख्य रूप से तीन प्रजातियाँ पायीं जाती हैं।
1- हिरोग्लाइफस नाइग्रोरेप्लेट्स
2- हिरोग्लाइफस वेनियान
3- ऑक्सिया विलाक्स
गन्ना फसल में मुख्य रूप से वेनियान प्रजाति का ही प्रकोप अधिकांष क्षेत्रों में पाया जाता है। अक्टूबर-नवम्बर में मादा जमीन के अन्दर मेंड़ों, सिंचाई की नालियों के किनारे, नहर की पटरियों तथा गन्ने के क्लम्प के आसपास ऊॅंचे स्थानों पर एक थैलीनुमा झिल्ली में अण्डे देती हैं। प्रथम वर्षा के पष्चात् जून-जुलाई में इन अण्डों से छोटे-छोटे फुदकने वाले हाॅपर निकलते हैं जो षुरुआत में घास की पत्तियों को खाकर बड़े होते हैं तथा 8-10 सप्ताह मंे प्रौढ़ बन जाते हैं। गन्ना फसल में इस कीट के प्रौढ़ तथा निम्फ दोनों पत्तियों के हरे भाग को खाते हैं। इस कीट का प्रकोप जुलाई से सितम्बर माह तक होता है।
हानि
भीषण प्रकोप की दशा में गन्ने की पत्तियों के बीच की मध्य शिरा ही शेष रह जाती है तथा फसल बाहर से झाड़ीनुमा प्रतीत होती है। पौधों में पत्तियों की कमी से कायिकी प्रभावित होकर बढ़वार रुक जाती है तथा उपज व चीनी परते पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
नियंत्रण
1- गर्मी के दिनों में खाली खेत की गहरी जुताई एवम् मेड़ों की ड्रेसिंग करने से इस कीट के अण्डे नश्ट हो जाते हैं।
2- प्रभावित फसल में बायोनीम 50 प्रतिषत घोल दर 1250 मि0ली0/हे0 को 1250 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करना लाभप्रद पाया गया है।
सैनिक कीट (आर्मी वर्म)
इस कीट की सूड़ी अवस्था गन्ने की पत्तियों को खाकर हानि पहुँचाती है। मादा कीट गन्ने की पत्तियों के पत्रकंचुक में एक समूह में अण्डे देती है। इन अण्ड समूहों से 4-5 दिन बाद छोटी-छोटी सूडियाँ निकलकर शाम के समय सैनिकों की भाँति समूह में गन्ना फसल की पत्तियों को खाती हैं। सूडि़यों के षरीर के मध्य दोनों ओर लम्बाई में चार धारियाँ पायी जाती हैं। दिन के समय सूड़ियाँ जमीन के अन्दर सूखी पत्तियों, पत्तियों के पत्रकंचुकों एवं गोंफ में छिपी रहती हैं। वर्ष में इसकी दो पीढ़ियाँ पाई जाती हैं। पेड़ी फसल में इस कीट का प्रकोप अधिक होता है।
हानि
भीषण प्रकोप की दशा में गन्ने की पत्तियों की केवल मध्य शिरा ही शेष रह जाती है जिसके कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है तथा उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
नियंत्रण
1- प्रोफिनोफॉस 40 प्रतिशत + साइप्रस 4 प्रतिशत घोल दर 750 मि0ली0 / हे0 को 625 ली० पानी में घोलकर छिड़काव करना ।
2- प्रभावित खेतों में गन्ना कटाई के पश्चात सूखी पत्तियों को बिछाकर जला देना चाहिये।
3- फौजी कीटों से प्रभावित क्षेत्रों में जमाव के पश्चात गन्ने की लाइनों के बीच में सूखी पत्तियाँ नहीं बिछानी चाहिये।
स्लग कैटरपिलर
इस कीट का प्रौढ़ हरे रंग का होता है तथा सूडि़यों का रंग गहरा हरा होता है जिस पर नारंगी रंग की तीन प्रमुख धारियॉं पायी जाती हैं। ये देखने में बहुत सुस्त होते हैं परन्तु पत्तियों को तेजी से खाते हैं। शरीर के किसी हिस्से में छू जाने पर शरीर में तेज खुजली एवं करेन्ट जैसा लगता है। इस कीट का प्रकोप जून से नवम्बर तक रहता है। मादा पौढ़, पत्तियों की निचली सतह पर 2–3 कतारों में समूह में अण्डे देती है। अण्डों से 4–6 दिन पश्चात् सूडि़यॉं निकल आती हैं। सूडि़यों का जीवन काल लगभग एक माह का होता है तत्पश्चात् सूडि़यॉं प्यूपा में परिवर्तित हो जाती हैं। प्यूपा से 25–30 दिन में प्रौढ़ निकल आते हैं। वर्ष में इसकी दो पीढि़यॉं पायी जाती हैं। प्रथम पीढ़ी जून से प्रारम्भ होती है तथा दूसरी अगस्त के अन्त से प्रारम्भ होती है। यह कीट नवम्बर से प्यूपा के रूप में भूमि के अन्दर शीत एवं ग्रीष्म ऋतु को व्यतीत करता है। इस कीट की सूडि़यॉं ही पत्तियों को खाती हैं तथा ग्रसित फसल में केवल मध्य शिरा ही शेष बच पाती है।
नियंत्रण
1- सूंड़ियों को एकत्र कर नष्ट कर दे।
2- प्रोफिनोफॉस 40 प्रतिशत + साइप्रस 4 प्रतिशत घोल दर 750 मि0ली0 / हे0 को 1250 ली० पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए ।
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