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गन्ने में लगने वाले रोग तथा एकीकृत रोग प्रबन्धन

गन्ना वानस्पतिक प्रवर्धन द्वारा उगाई जाने वाली लम्बी अवधि की फसल है जो वर्ष भर या उससे भी अधिक समय तक खेत में खड़ी रहती है। इस दौरान फसल जमाव, ब्यॉंत तथा विस्तार आदि अवस्थाओं से गुजर कर परिपक्वता की स्थिति में पहुँचती है। इन अवस्थाओं से गुजरते समय फसल अगोले से लेकर जड़ तक अनेक प्रकार की ब्याधियों द्वारा प्रभावित होती है।

सामान्यत: गन्ने की फसल में रोगों द्वारा गन्ने की उपज में 18 से 31 प्रतिशत तक की हानि देखी गयी है परन्तु रोगों की महामारी की दशा में सम्पूर्ण फसल नष्ट हो सकती है। रोगों द्वारा की गयी हानि से कृषक एवं मिल मालिक दोनों ही प्रभावित होते हैं।

 
प्रमुख रोग(Major diseases)
1.लाल सड़न (Red Rot)
लाल सड़न गन्ने का सबसे भयंकर रोग है जिसे गन्ने का कैंसर भी कहते है। यह रोग कोलेटोट्राइकम फलकेटम नामक फफूंद द्वारा होता है। इस रोग के लक्षण जुलाई–अगस्त माह से दिखाई देना प्रारम्भ होते हैं तथा फसल के अन्त तक दिखाई देते हैं। ग्रसित गन्ने की अगोले की तीसरी से चौथी पत्तियॉं एक किनारे अथवा दोनों किनारों से सूखना प्रारम्भ हो जाती हैं तथा धीरे–धीरे पूरा अगोला सूख जाता है। गन्ने को लम्बवत् फाड़ने पर इसके तने का गूदा लाल रंग का दिखाई देता है जिसमें सफेद धब्बे दिखाई पड़ते हैं।फटे हुये भाग में सिरके जैसी गन्ध आती है तथा गन्ने आसानी से बीच से टुट जाते हैं कभी–कभी गन्ने की पत्ती की मध्य शिरा पर लाल रंग के धब्बे पाये जाते हैं। बाद में ये धब्बे पूरी मध्यशिरा को घेर लेते हैं। कभी–कभी भूरे लाल रंग के धब्बे गन्ने की पत्ती पर पाये जाते हैं।
 
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