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पोक्का बोइंग (Pokkah Boeng)
यह एक फफूंदी जनित रोग है जो फ्यूजेरियम मोनलिफ़र्मी द्वारा फैलता है। रोग की प्रारम्भिक अवस्था में अगोेले की पत्तियों पर सफेद धब्बे पड़ते है जहाँ से पट्टी सड़ कर नीचे गिर जाती है। संक्रमण की तीव्रता अधिक होने पर अगोेले की साड़ी पत्तियां ,मुड़कर,सुखकर गिर जाती है । गन्ने का ऊपरी भाग ठूंठ की भांति दिखाई देता है ।पत्तियों के सड़कर नीचे गिर जाने से पौधों की बढ़बार प्रभावित होती है । पोक्का बोइंग की रोकथाम हेतु कॉपर ऑक्सी क्लोराइड के 0.2 % विलयन का 15 दिन के अन्तराल पर दो छिड़काव लाभप्रद है
पाइन एपिल रोग (Pineapple disease)

यह एक फफूंदी जनित रोग है जोसिरेटोसिस्टस पैरोडोक्सा द्वारा फैलता है। इस रोग का नाम पाइन एपिल रोग इसलिये रखा गया क्योंकि ग्रसित पैड़ों से अनानास के फल जैसी महक आती है। यह महक गन्ने के पैड़ों में ब्याधिजन द्वारा मेटाबोलिक क्रियाओं के दौरान इथाइल ऐसीटेट बनने के कारण आती है।

इस रोग के लक्षण गन्ने की बुवाई करने के दो–तीन सप्ताह बाद देखने को मिलते हैं। ब्याधिजन पैड़ों के कटे हुये भागों से प्रवेश कर जाता है तथा प्रभावित ऊतकों में पहले लाल रंग उत्पन्न करता है जोकि बाद की अवस्थाओं में भूरे लाल रंग में परिवर्तित हो जाता है। ब्याधिजन के कारण पैड़ों की गॉंठों पर जड़ें नहीं बन पाती हैं। इस रोग के कारण पैड़े सड़ जाते हैं जिसके कारण जमाव नहीं हो पाता है।

पत्ती का लाल धब्बा रोग (Red Leaf Spot)
यह फफूंदी जनित रोग जो स्टेकीबोट्रीज बीसपी द्वारा होता है वर्षाकाल में प्रारम्भ होता है। प्रारम्भ में पत्तियों पर लाल रंग के बिन्दु की तरह धब्बे बनते हैं जिनके किनारे पीलापन लिये हुये होते हैं। बाद में ये धब्बे नील लौहित रंग (परप्लिश रैड) के हो जाते हैं। धब्बे गोल या अण्डाकार होते हैं जोकि दो या दो से अधिक धब्बे आपस में मिल जाने पर अनियमित आकार के हो जाते हैं। प्राय: ये धब्बे 0.5–2.0 मि0मी0 व्यास तक के होते हैं। धब्बे के केन्द्र का रंग राख की तरह नही रहता है जोकि इस रोग को रिंग स्पॉट रोग से भिन्न करता है। धब्बों की सघनता हो जाने पर पत्तियों का क्लोरोफिल नामक पदार्थ नष्ट होने लगता है जिससे भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित होती है। फलत: पौधे की बढ़वार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
 
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