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टिशूकल्चर तकनीक द्वारा बीज गन्ना सम्वर्धन

बीज गन्ना सम्वर्धन हेतु आजकल टिशूकल्चर (ऊतक सम्वर्धन) तकनीक लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रही है। इस तकनीक द्वारा कम समय में अधिक बीज उत्पादन की प्रचुर सम्भावनायें हैं।

बीज गन्ना सम्वर्धन हेतु शूट टिप एवं मेरिस्टेम भाग उपयुक्त होते हैं। इनका 0.1 प्रतिशत मरक्यूरिक क्लोराइड के घोल से सतही विसंक्रमण करने के उपरान्त एम0एस0 कल्चर मीडीयम पर इनाकुलेट कर दिया जाता है। मीडीयम में साइटोकाइनिन, आक्जीन एवं जिबै्रलिन की उपस्थिति आवश्यक है। मातृ–पौध की वृद्धि के अनुसार लगभग 45-60 दिनों पश्चात् इन्हें शूट मल्टीप्लीकेशन द्रव मीडीयम पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है जहॉं लगभग 15 दिन में नये शूट विकसित होकर पौधों का गुच्छा बना लेते हैं। इन गुच्छों से पौधों को 2–3 के समूह में तोड़कर अलग–अलग कर लेते हैं तथा पुन: अलग–अलग जैमबाटल्स में फ्रेश मीडियम पर स्थानान्तरित कर लेते हैं। यह क्रिया प्रत्येक 12 से 15 दिन के अन्तराल पर दोहरायी जाती है। इस प्रकार एक एक्सप्लान्ट से 6 माह में लगभग एक लाख पौधे विकसित कर लिये जाते हैं। जड़ विहीन पौधों में जड़ विकसित करने हेतु 10–15 पौधों के समूह में उन्हें रूटिंग मीडीयम पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है। आमतौर पर 12-15 दिनों में पर्याप्त जड़ विकसित हो जाती है।

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