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टिशूकल्चर तकनीक द्वारा बीज गन्ना सम्वर्धन

जड़ विकसित होने के पश्चात पौधों को बाटल से निकालकर धो लेते हैं तथा छिद्रयुक्त पालीथीन (2 x 3 इंच) में भरे मृदा मिश्रण (मिट्टी : कम्पोस्ट : रेत, समभाग) में लगाकर ग्रीन हाउस में हार्डेनिंग हेतु रख देते हैं। एक माह पश्चात पौधों को प्रक्षेत्र पर 45 x 90 सेमी की दूरी पर प्रत्यारोपित कर तत्काल पानी लगा देना चाहिये। इस प्रकार एक एकड़ हेतु लगभग 9,500 पौधों की आवश्यकता होती है।

ऊत्तक सम्वर्धन पद्धति द्वारा नवीन विकसित गन्ना प्रजातियों का तीव्र प्रसार किया जा सकता है। उत्पादित पौधे प्राय: रोगरहित, कीट रहित होते हैं तथा किसी नवीन प्रजाति के तीव्र प्रसार होने के कारण इससे प्रक्षेत्र पर अपेक्षाकृत अधिक वर्षो तक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। टिशूकल्चर विधि द्वारा एक गन्ने से विकसित किये गये एक लाख पौधों से लगभग 4 हेक्टेयर ब्रीडर सीड नर्सरी स्थापित की जा सकती है जिससे आगामी वर्षो में लगभग 40 हेक्टेयर फाउन्डेशन सीड नर्सरी तथा 400 हेक्टेयर सर्टीफाइड सीड नर्सरी स्थापित की जा सकती है। इससे 4,000 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल आच्छादित होगा जबकि परम्परागत विधि द्वारा एक गन्ने से इतने ही समय में मात्र 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित किया जा सकता है।

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