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रासायनिक विधि

क्र0सं0

नाशिकीट

रासायनिक उपचार

9

सफेद ग्रव बिटिल
(व्हाइट ग्रव बिटिल)

अ– बुवार्इ के समय क्लोथियानीडीन 50 डब्लू0डी0जी0 का 250 ग्राम/हे0 की दर से 1875 ली0 पानी में घोल बनाकर पैडो के ऊपर डालकर ढ़कार्इ करनी चाहियें।

10

पायरिला

ग्रीष्मकाल में किसी एक कीटनाशक का छिड़काव 625 ली0 पानी में मिलाकर।

अ– फेन्थियान 100 प्रतिशत घोल 0.625 ली0/है0।

ब– क्लोरपायरीफॉस 20 प्रतिशत घोल0.80 ली0/है0।

स– डाईमेथोएट 30 प्रतिशत घोल 1.0 ली0/है0।

द–मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत 0.375 ली0/है0।

य– डाइक्लोरवास 76 प्रतिशत घोल 0.315 ली0/है0।

र– प्रोफिनोफास 40 प्रतिशत + साइपर 4 प्रतिशत का 750 मिली0 हे0|

ल– ट्राइएजोफास 40 प्रतिशत र्इ0सी0 का 750 मिली0हे0।

11

शल्क कीट
(स्केल इंसेक्ट)

अ– गन्ने की कटाई के बाद पताई जलाना।

ब– जहॉं तक सम्भव हो ग्रसित क्षेत्रों से पेड़ी की फसल न ली जाय।

स– यदि मिल मालिक की सहमति हो तो प्रभावित फसल को आग लगाकर खड़ी फसल को जलाने के पश्चात् तुरन्त गन्ना मिल को भेजना चाहिये।

12

सैनिक कीट

अ– फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत धूल 25 कि0ग्रा0/है0 सायंकाल धूसरण।

13

बूली एफिड

अ– थाओमेथाक्सम 150 ग्राम/हे0 को 625 ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना।

ब– इमिडाक्लोप्रिड 17.8% घोल 150 मि0ली0/हे0 का 625 ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना।

14

मिलीबग

अ– इमिडाक्लोप्रिड 17.8% का 175 मिली0/हे0 की दर से 625 ली0 पानी में घोल कर छिड़काव करना।

नोट :–
1
जहॉं पर फौजी कीटों के आक्रमण की सम्भावना हो वहॉं जमाव के बाद सूखी पत्ती नहीं बिछानी चाहिये।
2
यदि पायरिला परजीवी मौजूद हों तो रोकथाम हेतु दवा का छिड़काव नहीं करना चाहिये।
3
चोटीबेधक के नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूरान 3 जी0 का बुवाई के समय समुचित नमी की दशा में प्रयोग करने से दीमक/आंकुर बेधक भी कुछ सीमा तक नियंत्रित होते हैं परन्तु जहॉं पर दीमक व आंकुर बेधक की समस्या हो वहॉं पर संस्तुत सूची के पृष्ठ–1 के क्रम संख्या–2 मे वर्णित कीटनाशकों का प्रयोग किया जाय।
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