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उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद् की नियमावली के नियम–40 के अधीन बनायी गयी तथा नियम–55 के अधीन अध्यक्ष, गवर्निंगबॉडी तथा सभापति द्वारा अनुमोदित

19–कर्मचारियों को विशेष सुविधायें एवं प्रदेय
19–5 (अ) परिषद् को अधिकार होगा कि कर्मचारी अथवा कर्मचारी के परिवार के सदस्य की बीमारी की स्थिति में, किसी अन्य प्रकार की विपदात्मक अथवा अन्य आवश्यकता में अधिक से अधिक वर्ष में दो बार और प्रत्येक बार कर्मचारी की एक माह के कुल वेतन आदि के प्रति देय धनराशि की सीमा के भीतर ही अग्रिम स्वीकृत कर सके परन्तु यह अग्रिम स्वीकृति परिषद् का निदेशक या सक्षम अधिकारी जिसे इस कार्य हेतु गवर्निंगबाडी द्वारा अधिकृत किया गया हो, अपनी सूझ–बूझ, संतुष्टि एवं आवश्यकता की प्रकृति को देखते हुये करेगाऔर इस प्रकार के अग्रिम की स्वीकृति पर बल देने का अधिकार किसी कर्मचारी को नहीं होगा।
(ब)अग्रिम स्वीकृति का आदेश प्रत्येक कर्मचारी के लिये अलग–अलग किया जायेगा परन्तु निदेशक को अधिकार होगा कि विशिष्ट मामलों में वे सामान्य आदेश प्रसारित कर देवें।
19–6 परिषद् के समस्त श्रेणी के ऐसे कर्मचारियों को जिसे स्वयं या उनके आश्रित पत्नी/पति, पुत्र, अविवाहित पुत्री, आश्रित माता–पिता, आश्रित भाई एवं अविवाहित बहन को किसी गम्भीर बीमारी के कारण 07 दिन से अधिक अपने घर पर या किसी स्थानीय चिकित्सालय में शय्या पर रोगग्रस्त रहना पड़ा हो, उसे चिकित्सा पर हुये वास्तविक व्यय को चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण–पत्र तथा खर्चे की रसीद प्रस्तुत करने पर उसके एक माह के मूल वेतन तक की धनराशि का व्यय निदेशक की स्वीकृति के उपरान्त परिषद द्वारा वहन किया जायेगा। यह धनराशि सम्बन्धित कर्मचारियों को नियम 10–3 (ग) के अन्तर्गत अनुमन्य चिकित्सा भत्ता के अतिरिक्त होगी।
19–7 शासन से प्रतिनियुक्ति पर आये कर्मचारी/अधिकारी को ऐसे समस्त चिकित्सा व्यय का भुगतान उसकी बाह्य सेवाशर्तों के अनुरूप किया जायेगा।
20–नियमों की व्याख्या
इन नियमों की व्याख्या में यदि किसी समय कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसे अध्यक्ष के पास निर्णयार्थ भेजा जायेगा। अध्यक्ष द्वारा दी गयी व्याख्या अन्तिम व सर्वमान्य होगी।
21–कर्मचारियों की प्रोविडेन्ट फण्ड, ग्रेच्युटी तथा पेन्शन की सुविधा
परिषद के कर्मचारियों पर प्राविडेन्ट फण्ड, गे्रच्युटी तथा पेंशन के मामले में वही नियम लागू होगें जो उ0प्र0 राज्य सरकार के कर्मचारियों पर लागू हैं या भविष्य में किये गये संशोधन या तद्विषयक निर्गत शासनादेश व निर्देश सहित यथावत् समय–समय पर लागू होते रहेगें।
22–अन्य मामले
विभिन्न पदों/सेवाओं के लिये किसी प्रकार की मौखिक या लिखित संस्तुति पर विचार नहीं किया जायेगा। जो अभ्यर्थी अपने पक्ष में संस्तुति प्राप्त करने या अन्य प्रकार से प्रभावित करने का प्रयास करेंगे वे नियुक्ति हेतु अयोग्य माने जायेंगे।
 
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