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अन्त:फसल
 
SUGARCANE + URD
 
 
SUGARCANE + LAHI
 
 
SUGARCANE + WHEAT
 
1-दो पंक्तियों के मध्य दूरी अधिक होने के कारण अन्त: फसलों की उपज अच्छी होती है।
2-गन्ने की बुवाई नाली में तथा अन्त: फसलों की बुवाई मेड़ों पर होती है जिसके कारण प्रतियोगिता बहुत कम होती है। इस विधि में आलू की 1 या 2 पंक्ति, लहसुन की 3-4 पंक्ति, मटर व राजमा की 2–2 पंक्ति, लाही 2पंक्ति, गेहू 3-4 पंक्ति आसानी से ली जा सकती हैं जो गन्ने की उपज पर कोई दुष्प्रभाव नही डालती।
ट्रेन्च विधि के लाभ
1
जमाव 60-70 प्रतिशत तथा व्यॉत मृत्यु दर अधिकतम् 8 प्रतिशत जबकि सामान्य विधि में 35–40 प्रतिशत।
2
प्रति सिंचाई 60 प्रतिशत पानी की बचत।
3
उर्वरकों के सदुपयोग क्षमता में वृद्धि।
4
गन्ना अपेक्षाकृत कम गिरता है।
5
मिल योग्य गन्ने एक समान मोटे व लम्बे होते हैं जिसके कारण परम्परागत विधि की तुलना में 35–40 प्रतिशत अधिक उपज व 0.5 इकाई अधिक चीनी परता प्राप्त होती है।
6
अन्त: फसलों से गन्ने की प्रतिस्पर्धा बहुत कम होती है जिसके कारण दोनों फसलों की उपज अच्छी होती है।
7
सामान्य विधि की तुलना में इस विधि से पेड़ी गन्ना की पैदावार 15–25 प्रतिशत अधिक होती है।
8
भूमिगत कीट, ह्वाइट ग्रव एवं दीमक का आपतन कम होता है।
9
इस विधि द्वारा गन्ने के बाद गन्ना के कुप्रभाव को कम किया जा सकता है क्योंकि पेड़ी के बाद जहॉं गन्ना नहीं होता है वहॉं पर गन्ने की बुवाई की जाती है।
10
उत्तर भारत में उपज क्षमता व वास्तविक उपज में 35–40 प्रतिशत का अन्तराल है जिसे इस विधि द्वारा आसानी से पूरा किया जा सकता है।
11
क्षेत्रफल में बिना वृद्धि किये गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने में यह विधि किसानों के लिए सुलभ एवं उपयुक्त विधि है।
ट्रेन्च मैथड एवं परम्परागत विधि द्वारा गन्ना खेती उत्पादन लागत रू प्रति हेक्टेयर का तुलनात्मक अध्ययन(2007-09)

क्र0सं0

विवरण

ट्रेन्च मैथड

परम्परागत विधि

1

खेत की तैयारी

8,722

8,722

2

बीज व बीज तैयारी

28,000

21,000

3

बुवाई

4,800

3,600

4

सिंचाई

21,000

28,000

5

उर्वरक व उसका उपयोग

18,000

18,000

6

फसल सुरक्षा

9,000

9,000

7

कर्षण क्रियायें

21,000

28,000

8

कटाई

31,500

24,500

 

योग

1,42,022

1,40,822

1 2 3 4